
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के मंच पर भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान के दुष्प्रचार का करारा और बेहद सख्त जवाब दिया है। सुरक्षा परिषद में ‘सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा’ विषय पर आयोजित एक उच्च स्तरीय बहस के दौरान पाकिस्तान ने हमेशा की तरह अपनी पुरानी आदत दोहराते हुए कश्मीर का राग अलापा। इस पर भारतीय प्रतिनिधि ने बेहद कड़े और तार्किक शब्दों में पाकिस्तान को उसका आईना दिखाया।
इस पूरे घटनाक्रम और भारत के जवाबी हमले (Right of Reply) की विस्तृत और बिंदुवार जानकारी नीचे दी गई है:
आंतरिक विफलताओं को छिपाने के लिए कश्मीर का सहारा
बहस के दौरान जब पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाने की कोशिश की, तो संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वथनेनी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने पाकिस्तान पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि जिस देश का खुद का इतिहास नरसंहार, मानवाधिकारों के हनन और हिंसा से भरा हुआ है, वह भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के आंतरिक मामलों पर भाषण दे रहा है।
भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत विरोधी एजेंडा सिर्फ इसलिए चलाता है ताकि वह अपने देश की गंभीर आंतरिक विफलताओं, आर्थिक बदहाली और राजनीतिक अस्थिरता से अपनी जनता का ध्यान भटका सके।
अफगानिस्तान में पाकिस्तानी सेना की बर्बरता का पर्दाफाश
भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पाकिस्तान द्वारा हाल ही में अफगानिस्तान की सीमा के भीतर की गई सैन्य कार्रवाई का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया। हरीश पर्वथनेनी ने बताया कि इस साल पवित्र रमजान के महीने के दौरान पाकिस्तानी वायुसेना ने काबुल में स्थित ‘ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट अस्पताल’ (एक नशामुक्ति केंद्र) पर बेहद क्रूर हवाई हमला किया था।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) की आधिकारिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए इस हमले के भयानक आंकड़े पेश किए:
नागरिकों की मौत: इस हवाई हमले में 269 बेगुनाह नागरिकों की जान चली गई।
घायलों की संख्या: हमले में 122 लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
अस्पताल पर हमला: भारत ने जोर देकर कहा कि जिस जगह को निशाना बनाया गया, वह एक अस्पताल था, जिसे किसी भी कोण से सैन्य या आतंकी ठिकाना नहीं माना जा सकता। यह सीधे तौर पर युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है।
94 हजार से ज्यादा लोग हुए विस्थापित
भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान पर कायरतापूर्ण तरीके से अंधेरे का फायदा उठाकर निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। UNAMA के आंकड़ों को सामने रखते हुए भारत ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा सीमा पार की गई इस अंधाधुंध हिंसा और गोलाबारी के कारण 94,000 से अधिक नागरिक बेघर हो गए और उन्हें अपने ही घरों से विस्थापित होना पड़ा।
1971 के ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ का काला इतिहास याद दिलाया
पाकिस्तान को मानवता का पाठ पढ़ाने की औकात याद दिलाते हुए भारत ने इतिहास के उस काले पन्ने को पलटा, जिसे पाकिस्तान हमेशा छुपाना चाहता है। भारत ने साल 1971 में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में पाकिस्तानी सेना द्वारा चलाए गए खूनी अभियान ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ का जिक्र किया।
भारतीय प्रतिनिधि ने वैश्विक मंच पर आरोप लगाया कि:
“1971 के दौरान पाकिस्तानी सेना ने मानवता को शर्मसार करते हुए एक संगठित और सोचे-समझे अभियान के तहत 4 लाख से अधिक महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म (Mass Rape) किया था और लाखों निर्दोष लोगों का कत्लेआम किया था।”
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने यह साफ कर दिया कि जो देश खुद आतंकवाद का जन्मदाता और पोषक है, जिसने अपने पड़ोसियों के साथ-साथ अपने ही नागरिकों पर अत्याचार किए हैं, उसे कश्मीर जैसे भारत के अभिन्न हिस्से पर उंगली उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। भारत का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि वह वैश्विक मंचों पर अब पाकिस्तान के किसी भी झूठे प्रचार को बिना जवाब दिए नहीं छोड़ने वाला है।



